फ्रंट पेज न्यूज़ कुल्लू।
12 जून को टेबल टॉक ड्रिल और 15 जून को मॉक ड्रिल होगी आयोजित, कुल्लू सहित सभी जिलों को आपदा प्रबंधन व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
आगामी मानसून सीजन को देखते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन और राहत तैयारियों को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इसी क्रम में मंगलवार को मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशभर के जिलों में मानसून से पहले की गई तैयारियों की समीक्षा की गई और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
बैठक में कुल्लू से उपायुक्त अनुराग चन्द्र शर्मा, पुलिस अधीक्षक मदन लाल, अतिरिक्त उपायु0 अश्वनी कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष् अधिकारियों ने भाग लिया।
12 जून को टेबल टॉक ड्रिल, 15 जून को होगी मॉक ड्रिल
बैठक के दौरान बताया गया कि संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए 12 जून को टेबल टॉक ड्रिल और 15 जून को राज्यव्यापी मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इन अभ्यासों का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की जांच करना और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की प्रभावशीलता को परखना है।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग निर्धारित समय से पहले अपनी तैयारियां पूरी करें और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए संसाधनों को तैयार रखें।
विभागों ने प्रस्तुत किया मानसून पूर्व तैयारी का रोडमैप
बैठक में जिला स्तर पर विभिन्न विभागों द्वारा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से अपनी तैयारियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया।
प्रस्तुतिकरण में निम्न विषयों पर विशेष जानकारी साझा की गई—
- उपलब्ध मैनपावर एवं मशीनरी
- सड़क संपर्क बहाली की रणनीति
- जल शक्ति विभाग की तैयारियां
- विद्युत आपूर्ति बनाए रखने की योजना
- लोक निर्माण विभाग की कार्ययोजना
- एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ समन्वय
- आवश्यक वस्तुओं और राहत सामग्री का भंडारण
- आपदा की स्थिति में एडवांस प्लानिंग
इसके अलावा संभावित चुनौतियों और संसाधनों की उपलब्धता पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
अर्ली वार्निंग सिस्टम और संचार व्यवस्था पर विशेष फोकस
बैठक में बांधों में स्थापित अर्ली वार्निंग सिस्टम की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों में संचार व्यवस्था को मजबूत बनाने, सैटेलाइट फोन की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा खाद्यान्न और आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त भंडारण करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने कहा कि आपदा के समय सूचना का त्वरित आदान-प्रदान और प्रभावी संचार व्यवस्था राहत एवं बचाव कार्यों की सफलता की कुंजी है।
धार्मिक यात्राओं और ट्रैकिंग गतिविधियों पर विशेष निगरानी
मानसून के दौरान प्रदेश में होने वाली धार्मिक यात्राओं और ट्रैकिंग गतिविधियों को लेकर भी बैठक में विशेष चर्चा हुई।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। मौसम संबंधी चेतावनियों का समय पर प्रसार किया जाए तथा सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखा जाए।
इसके साथ ही मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
जन-धन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: अनुराग चन्द्र शर्मा
उपायुक्त अनुराग चन्द्र शर्मा ने बैठक के बाद बताया कि जिला प्रशासन मानसून सीजन को लेकर पूरी तरह सतर्क और तैयार है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों को संभावित आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए समयबद्ध तरीके से तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम रखना और प्रभावित लोगों तक राहत एवं सहायता शीघ्र पहुंचाना है।
प्रदेश में मानसून के आगमन से पहले प्रशासनिक स्तर पर की जा रही ये तैयारियां इस बात का संकेत हैं कि सरकार संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से ही व्यापक रणनीति पर काम कर रही है।








